बेचैनी के हिंडोले पे बैठ कर गाता
अक्सर अपने दर्द को सहलाता
कभी आसुओं से चेहरे नहलाता
कभी प्रेम और विरह के तराने गाता
सब से छुपाता अपने दर्द को
हँसी को अपने चेहरे पर खूबलाता
सब कहते प्रेमी दीवाना पागल कहींका
दिल करता कभी उसे भूलपाता
कौन समझाए इस पागल दिल को
जो यार छोड़ जाये बीच मझधार में
वो भी कभी वापस नहीं मिल पाता
यादें तो बहती हवाएं कौन रोक पाता
अक्सर अपने दर्द को सहलाता
कभी आसुओं से चेहरे नहलाता
कभी प्रेम और विरह के तराने गाता
सब से छुपाता अपने दर्द को
हँसी को अपने चेहरे पर खूबलाता
सब कहते प्रेमी दीवाना पागल कहींका
दिल करता कभी उसे भूलपाता
कौन समझाए इस पागल दिल को
जो यार छोड़ जाये बीच मझधार में
वो भी कभी वापस नहीं मिल पाता
यादें तो बहती हवाएं कौन रोक पाता

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