खोकर सब कुछ पाना हकीकत नहीं
भूलकर सब याद न करने में क्या
कोई हर्ज होता है क्या जानना चाहूँ
मीत और प्रीत में कोई फरक है क्या
याद में तेरी आंसू गिरे मुझे है गवारा
मेरे हर अहसास की परवरिश क्यों
कर तुने इतना क्यों उसे यूँ संवारा
क्या आशिकी आवारगी है तो मुझे
कोई शिकायत नहीं तुझे न पाने से
तेरे दिल में मेरे लिए कोई जगह नहीं
वफाओं में तन से क्या लेना मन तो
तेरा मेरे लिए है ये bhula नही मैं
सुनहरे मन की ये तेरी सचाई है क्यों
जो मुझसे छुपा जाती है तेरे दर्द क्यों
तू कोई पारो नहीं मैं कोई देव नहिना
तू है सिर्फ़ अगर सच्चाई मैं भी फरेब नहिना
भूलना नहीं मर जाते हैं जग में रिश्ते दोस्ती नहिना
bahut accha likha hai aapne dost
ReplyDeletedil chu gaya aapka likha hua