फ़क्त दीवानगी को प्यार ना समझ लेना,
फ़क्त हँसने को भी प्यार का नाम न देना,
सुनहरे फूलों में कांटे भी होते हैं यार मेरे ,
कहने को लोग काँटों से दोस्ती करली कहते हैं ,
हम दोस्तों को कांटे नहीं कहते जख्म भी सह लेते,
हंस कर जी लेते हैं क्योकि चार दिन के मेले हैं,
दिल कहता है दीवानगी काम आयेगी रोने से नहीं ,
ये मेरी हंसी एक दिन उसकी भी आदत बन जायेगी.
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