Tuesday, October 27, 2009

फ़क्त दीवानगी को प्यार ना समझ लेना,

फ़क्त हँसने को भी प्यार का नाम न देना,

सुनहरे फूलों में कांटे भी होते हैं यार मेरे ,

कहने को लोग काँटों से दोस्ती करली कहते हैं ,

हम दोस्तों को कांटे नहीं कहते जख्म भी सह लेते,

हंस कर जी लेते हैं क्योकि चार दिन के मेले हैं,

दिल कहता है दीवानगी काम आयेगी रोने से नहीं ,

ये मेरी हंसी एक दिन उसकी भी आदत बन जायेगी
.

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