Monday, December 21, 2009


भेजा है आपने दोस्ती का पैगाम,
हम कहाँ रुकने वाले हैं ,
दोस्ती ही मेरा मजहब
दोस्ती मेरा पैगाम है,
दोस्ती ही मेरा सभी को
प्यार भरा जाम है........
आओ यार मिल बैठें छलकाएं ..............
जात पांत मजहब भूलकर इन्सान बन जाएँ ....................
आओ यारों नव भारत का सृजन करें ,
एकता की ड़ौर और मजबूत बनायें.........जय भारत माता की,
वन्दे मातरम

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