


पुनीत प्रयासों की मंजिलें हमेशा अजीब होती है ,
छुना होता है वो आसमा जिसकी जमीं नहीं होती है,
फिर भी पा जाते हैं कुछ लोग वो मंजिलें नामुमकिन होती हैं,
देख ख़ुशी उनके चेहरे पर वो ये जमाना उन्हें फ़रिश्ता कहता है,
होता है वो अदभुत सा चमत्कार जो एक इन्सान करता है,
अंतर मन की अदभुत यात्रा इन्सान अपने को खुदा कहता है,
मेरी अदभुत इच्छा तरक्की करे इन्सान का अविष्कार हो,
आत्मा-हाड़-मांस-रक्त का निर्माण हो इंसानों का अविष्कार हो,
गुजर गए युग पर युग अब तक रचनात्मकता अदभुत ही है,
राम-कृष्ण-बुद्ध-महावीर-मोहम्मद पैगम्बर-जीसस दिलों मैं ,
क्यों आज तक कायम हैं किसी को इसका गुमान हो शायद ?
चार उपलब्धियों की मदहोशी खतरनाक भागवान बनते हैं,
इंसान के जान लेने का काम करते को खुदा कहते हैं,
जो चीज दिलों में पेवस्त ईशवर की अदभुत अविष्कार हैं,
कोई न बना पाया सूरज-चाँद-सितारे-नभ के नयनाभिराम नज़ारे,
सब ईशवर उसकी माया अदभुत अनजान दिलों में समाया है.
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