Monday, December 21, 2009


भेजा है आपने दोस्ती का पैगाम,
हम कहाँ रुकने वाले हैं ,
दोस्ती ही मेरा मजहब
दोस्ती मेरा पैगाम है,
दोस्ती ही मेरा सभी को
प्यार भरा जाम है........
आओ यार मिल बैठें छलकाएं ..............
जात पांत मजहब भूलकर इन्सान बन जाएँ ....................
आओ यारों नव भारत का सृजन करें ,
एकता की ड़ौर और मजबूत बनायें.........जय भारत माता की,
वन्दे मातरम

Tuesday, October 27, 2009

जीवन नैया चली जा रही है न कोई छोर न ठिकाना है ,
मंद हवाओं के संग बहे जा रहे हैं दोस्तों से साथ लिए हैं,
नर्म मखमली अहसास जिंदगी को सुकून दिए जा रहा है,
न कोई फिक्र है न कोई चिंताएँ हैं न कोई बहाने हैं,
है वो सब अपना जो साथ खुदा दिया तुने भी तेरा हाथ है,
कठनाइयों को पार करने दिए हैं खुदा अपने हाँथ सदा हैं,
तुझे न भूल पाऊं निसदिन ऐ खुदा बंदगी तेरी ही है,
न राज चाहिए न मुक्ति फ़क्त तेरी बंदगी में जीना है,
साधू जीवन हो साधुता की मित्रता हो तेरे बन्दों में है,
मन्दिर मस्जिद गुरूद्वारे सब हों सदा मेरे सिख दी है,
दाता दानी बड़ा सब जगत का तू ही पालनहार भी है,
अद्भुत आनंद का दाता ज्ञान ध्यान का सागर भी है,
कृपा रखना राखी जो सब नीचन पर सदा राखी है,
न अंगुल मॉल सी गति मेरी न सुदामा सी दिव्या दृष्टि है,
न हनुमंता सी मित्रता न बाली सुग्रीव सा जीवन मेरा है,
न पांडू पुत्रों सा ज्ञान न मैं कोई चतुर सुजान हूँ मैं,
न किए रावन से तप न अहिल्या सम तेरा इंतजार है,
राख मन मेरे प्रभु सदा आपनी शरणा भवसागर है,
तेरा पर कर न कर दर तेरे सदा पड़ा ये अज्ञानी है,
मूढ़ मस्तक पड़ा तेरे चरना दया दान कीजिये ,
फ़क्त दीवानगी को प्यार ना समझ लेना,

फ़क्त हँसने को भी प्यार का नाम न देना,

सुनहरे फूलों में कांटे भी होते हैं यार मेरे ,

कहने को लोग काँटों से दोस्ती करली कहते हैं ,

हम दोस्तों को कांटे नहीं कहते जख्म भी सह लेते,

हंस कर जी लेते हैं क्योकि चार दिन के मेले हैं,

दिल कहता है दीवानगी काम आयेगी रोने से नहीं ,

ये मेरी हंसी एक दिन उसकी भी आदत बन जायेगी
.

Tuesday, September 29, 2009

चिराग रोशन हो तो अंधेरे कट जाते हैं

पतंगे रोशनी के आशिक होते हैं

क्या कोई रोक सका पतंगों की रोशनी से प्रीत

क्या तेरी दोस्ती नहीं बन गई मेरी जीवन गीत

खोकर सब कुछ पाना हकीकत नहीं
भूलकर सब याद न करने में क्या
कोई हर्ज होता है क्या जानना चाहूँ
मीत और प्रीत में कोई फरक है क्या
याद में तेरी आंसू गिरे मुझे है गवारा
मेरे हर अहसास की परवरिश क्यों
कर तुने इतना क्यों उसे यूँ संवारा
क्या आशिकी आवारगी है तो मुझे
कोई शिकायत नहीं तुझे न पाने से
तेरे दिल में मेरे लिए कोई जगह नहीं
वफाओं में तन से क्या लेना मन तो
तेरा मेरे लिए है ये bhula नही मैं
सुनहरे मन की ये तेरी सचाई है क्यों
जो मुझसे छुपा जाती है तेरे दर्द क्यों
तू कोई पारो नहीं मैं कोई देव नहिना
तू है सिर्फ़ अगर सच्चाई मैं भी फरेब नहिना
भूलना नहीं मर जाते हैं जग में रिश्ते दोस्ती नहिना
मुझसे हाल पूछकर वो अपना हाल छुपाते हैं
दर्द पीकर दिल पे जखम भी खाते जाते हैं
क्यों नहीं समझता मैं नादाँ वो क्या चाहते हैं
क्यों कर खुलकर नही कह पता ये आंसू क्यों हैं
छुपा कर वो क्या जतलाना चाहते मुझसे हैं
क्या अपनों से छुपाकर कोई दर्द रखता है
क्या अपना कहकर भी अपनों से यूँ करता है
हमदर्द हमराज कहकर कोई यूँ कैसे करता है
हम तो उनकी राहों फूलों के पत्ते चाहते हैं
रेशम हम कहते हैं इसलिए पलकों से सहलाते हैं
कह दे जरा वो हम से अपना दर्द एक नदी जैसे
सागर ने नदी को कभी आगोश से मना किया है
गंगा ने कभी किसी के पापों को नहीं लिया है
क्या मोती ने सीप का दर्द नहीं समझा है
दोस्ती दोस्तों से है मेरे यार क्या तुने नही जाना है
क्यों कहते फिरते हो दोस्त मुझे तुने आपना माना है

dil ki yaden

bite dino ki yaden dil me basa lena dabakar rakehe kitab ke foolon jaiseyadon ka sawan barse ye anken jabmilne ko tarse dil ko samjhana aise diwangi ki umra hoti hai hogaye humjuda un modon se jinpe kabhi thaye ancal laharaya bina ghunghat keye chehara tha sharmaya dekhane ki chahaton me kisi ko in ankohn kojhukaya aur na jane kab ankho mebasaye khwab sunahar kuch bhulekuch the bisare dil nahin manta fir bhi gate rahata hai yara koi lauta demere vo suhane jindagi ke bite din. . . . . .